Varanasi News : ज्ञानवापी में वजूस्थल को छोड़कर संपूर्ण परिसर का सर्वे का आज 10वां दिन है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी परिसर का लगातार सांइटिफिक सर्वे चल रहा है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की 40 सदस्यीय विशेषज्ञों और कर्मियों की टीम लगी हुई है। सर्वेक्षण का 10 वां दिन काफी महत्वपूर्ण है। आज सर्वे में ASI GPR मशीन के सर्वे की तरफ कदम बढ़ाएगी। इसमें GPR मशीन लगाने के जगहों का मार्किग सबसे अहम है। वहीं, अंदर तहखाना साफ होने के साथ ही उसकी बारीकी से जांच की जा रही है। तीन अगस्त को हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिसर के ऐतिहासिक वजूद को खंगालने में टीमें जुटी हैं।

ऐतिहासिक पहलू आएगा समाने
जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत के आदेश के बाद 24 जुलाई को हुए 5 घंटे के सर्वे और फिर हाईकोर्ट के आदेश के बाद 4 अगस्त से शरू हुआ ज्ञानवापी परिसर का साइंटिफिक सर्वे लगातार जारी है। रोजाना टीम सुबह 8 बजे पहुंच रही है। उसके बाद दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर लंच और नमाज के लिए रोका जा रहा है और उसके बाद दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक सर्वे का काम हो रहा है। ASI ने परिसर की सभी दीवारें, पश्चिमी दीवार, तहखाना, तीनों गुंबद आदि की मैपिंग, स्केचिंग, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और थ्रीडी इमेजिंग तैयार की है साथ ही इस ऐतिहासिक पहलू की खोज में टोपोग्राफी शीट पर नक़्शे भी बनाए गए हैं।
टीम से दूर रहेंगे हिंदू और मुस्लिम पक्ष
ज्ञानवापी परिसर में ASI सर्वे के दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच बढ़ती तल्खी को देखते हुए नई व्यवस्था की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार सर्वे के दौरान अब हिंदू और मुस्लिम पक्ष के लोग ASI की टीम से दूर रहेंगे। यह नई व्यवस्था गुरूवार से लागू हो गई है। हिंदू या मुस्लिम पक्ष के लोगों को अपनी बात ASI टीम से बतानी होगी। इसके बाद सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर में प्रवेश और निकास के समय उनसे बात कर सकेंगे। सर्वे के दौरान अब हिंदू या मुस्लिम पक्ष के लोग टीम के साथ नहीं रहेंगे, किसी तरह के सवाल भी नहीं करेंगे।
भ्रामक सूचनाएं रोकने के लिए कोर्ट ने लगाई रोक
ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान भ्रामक सूचनाओं को लेकर जिला जज ने आदेश जारी किया है। जज ने आदेश में कहा कि कवरेज को लेकर अदालत ने आदेश दिया है कि सर्वे के संबंध में औपचारिक सूचना के बगैर गलत प्रकार से समाचार के प्रकाशन पर विधि के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, यह भी कहा है कि ASI, वादी-प्रतिवादी व उनके अधिवक्ता, डीजीसी (सिविल) या कोई अन्य अधिकारी सर्वे के संबंध में किसी को न कोई सूचना देंगे और न कोई टिप्पणी करेंगे। कोर्ट के आदेश के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी निगरानी में जुटी हैं।