Spread the love

Varanasi : वाराणसी के देवनाथपुरा स्थित आंध्रा आश्रम के काशी कैलाश भवन में सूदखोरों से परेशान आंध्र प्रदेश के एक परिवार के 4 लोगों ने गुरुवार को सुसाइड किया था। दंपती और उनके दो बेटों ने तारपीन का तेल पीने के बाद फंदा लगाकर जान दी थी। दंपती के बड़े बेटे ने हाथ की नस भी काटी थी। शनिवार को चारों के शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई। पोस्टमार्टम के बाद दंपती और उनके दोनों बेटों के शव की अंत्येष्टि आंध्रा आश्रम के मैनेजर सुंदरम शास्त्री के सहयोग से हरिश्चंद्र घाट पर की गई।

जानें क्या लिखा था सुसाइड नोट में

आंध्र प्रदेश के रहने दंपती और दो बेटों ने धर्मशाला के जिस कमरे में एक साथ जान दी थी, वहां ढाई पेज का तेलुगु में लिखा सुसाइड नोट मिला था। सुसाइड नोट में लिखा था कि राजेश ऑटोमाबाइल की जिस दुकान में काम करता था वहां के छह लाख रुपये खुद पर खर्च कर दिया था। इस पर दुकान मालिक पेंटगतला प्रसाद ने पूरे परिवार से जबरन सादे कागज और बांड पर दस्तखत करा लिया था। राजेश ने पांच लाख रुपये दिए तो दुकान मालिक ने कहा कि कागज और बांड पर 20 लाख रुपये लिखा है और उतना ही चाहिए। परेशान होकर तमिलनाडु, हरिद्वार और कोलकाता होते हुए काशी आए। पैसे खत्म होने के बाद चारों ने फंदा लगाकर जान दे दी। परिजनों ने आंध्र प्रदेश से काशी आने के लिए मना कर दिया तो पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।

वाराणसी में ही खरीदी रस्सी और तारपीन का तेल

दंपती और उनके दोनों बेटों ने फंदा लगाने के लिए नायलॉन की नई रस्सी बनारस में ही खरीदी। तारपीन का तेल भी उन्होंने यहीं खरीदा। काशी कैलाश भवन के कमरे का तीन दिसंबर से सात दिसंबर की सुबह तक के किराये का भुगतान राजेश ने बुधवार की दोपहर ही कर दिया था। भवन के मैनेजर ने बताया कि अन्य श्रद्धालुओं की भांति दंपती और उनके दोनों बेटे भी सामान्य तरीके से रह रहे थे। आंध्रा आश्रम में मिलने वाला नि:शुल्क भोजन भी चारों लोग सामान्य क्रम में ही कर रहे थे। आईडी प्रूफ के रूप में राजेश ने अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी दी थी। उनकी गतिविधि से रत्तीभर भी शंका नहीं हुई थी कि वह ऐसा आत्मघाती कदम उठाएंगे।

दशाश्वमेध थाने की पुलिस रवाना हुई आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश निवासी दंपती व उनके दो बेटों को आत्महत्या के लिए उकसाने और धमकाने के आरोप में दशाश्वमेध थाने में तीन आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए दशाश्वमेध थाने के एक दरोगा और तीन सिपाहियों की टीम आंध्र प्रदेश रवाना की गई है। एसीपी दशाश्वमेध अवधेश कुमार पांडेय ने बताया कि प्रकरण के आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

कभी मोक्ष तो कभी निजी कारणों से जान देते रहते हैं दक्षिण भारतीय श्रद्धालु

काशी में दक्षिण भारतीय श्रद्धालु कभी मोक्ष के लिए तो कभी अन्य निजी कारणों की वजह से जान देते ही रहते हैं। इससे पहले 21 सितंबर की रात गणेश महाल स्थित एक गेस्ट हाउस में बंगलूरु निवासी बीएच कृष्णमूर्ति ने फंदा लगाकर जान दे दी थी। 18 अगस्त को वाराणसी आए तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी रेवांथा मोहनराज और उनकी रिश्ते की चचेरी बहन श्रीसीजे शिवाला स्थित एक होटल के कमरे में मृत मिले थे। इससे पहले भी इसी तरह के प्रकरण थोड़े-थोड़ अंतराल पर सामने आते रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *