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Varanasi : वाराणसी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 45वां दीक्षांत समारोह सोमवार को मनाया जा रहा है। इस दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आ रही हैं। राष्ट्रपति ने कलश में पानी डालकर दीक्षांत समारोह की शुरुआत की। इस दौरान 16 मेधावियों को गोल्ड मेडल और डिग्री प्रदान की गई। इसके बाद वो बापू भवन भी जाएंगी और वहां महात्मा गांधी से सम्बंधित संजोई गई यादों का अवलोकन करेंगी। इसके बाद सर्किट हॉउस जाएंगी और कुछ देर विश्राम के बाद राष्ट्रपति वापस नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगी। ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी स्टेट विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति दीक्षांत समारोह में मौजूद हैं। समारोह में राज्यपाल ने संबोधन दिया। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं को बधाई दी और राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया।

राष्ट्रपति के संबोधन की बड़ी बातें

राष्ट्रपति ने कलश में पानी डालकर दीक्षांत समारोह की शुरुआत की। राज्यपाल के संबोधन के बाद महामहिम ने सभी विद्यार्थियों, उनके शिक्षकों और परिजनों को बधाई दी। राष्ट्रपति ने कहा, बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आना अपने आप में सौभाग्य की बात है। काशी का अभिप्राय है सदैव प्रकाशमान रहने और सदैव प्रकाशित रखने वाला ज्योतिपुंज। पिछले महीने काशी में देव दीपावली का पर्व भव्यता से मनाया गया। मुझे बताया गया है कि उस पर्व को 72 देशों के प्रतिनिधियों ने हमारे देशवासियों के साथ यहां मनाया। हिन्दी माध्यम में उच्च-स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए बाबू शिव प्रसाद गुप्त जी ने काशी विद्यापीठ की अपनी परिकल्पना की चर्चा महात्मा गांधी से की थी और गांधीजी ने उसे सहर्ष अनुमोदन प्रदान किया था। हमारे देश की स्वाधीनता के 26 वर्ष पूर्व, गांधीजी की परिकल्पना के अनुसार आत्म-निर्भरता तथा स्वराज के लक्ष्यों के साथ, इस विद्यापीठ की यात्रा शुरू हुई थी। ब्रिटिश शासन की सहायता और नियंत्रण से दूर रहते हुए, भारतीयों द्वारा पूर्णत: भारतीय संसाधनों से निर्मित, काशी विद्यापीठ का नामकरण ‘महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ’ करने के पीछे हमारे स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की भावना निहित है। उन आदर्शों पर चलना तथा अमृत-काल के दौरान देश की प्रगति में प्रभावी योगदान देना यहां के विद्यार्थियों द्वारा विद्यापीठ के राष्ट्र-निर्माता संस्थापकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का ध्येय वाक्य है विद्ययाऽमृतमश्नुते…। यह ध्येय वाक्य ईशा-वास्य उपनिषद से लिया गया है। ईश उपनिषद में यह बोध कराया गया है कि व्यावहारिक ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान एक दूसरे के संपूरक हैं। व्यावहारिक ज्ञान से अर्थ, धर्म और कामनाओं की सिद्धि होती है। विद्या पर आधारित आध्यात्मिक ज्ञान से अमरता यानी मोक्ष की प्राप्ति होती है।
चिर-नवीन की परिधि में विज्ञान तथा व्यावहारिक ज्ञान की आधुनिकतम धाराएं समाहित हैं। आप सभी विद्यार्थियों को चिर-पुराण और चिर-नवीन के समन्वय को अपनी शिक्षा, आचरण और जीवन में उतारना है। तब आप राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, भारतीय परम्पराओं से जुड़े रह कर इक्कीसवीं सदी के आधुनिक विश्व में सफलताएं अर्जित करेंगे।

राज्यपाल ने की अगवानी

इसके पहले तय समय पर वाराणसी एयरपोर्ट पर विशेष विमान से पहुंची राष्ट्रपति का स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। इस दौरान महापौर अशोक तिवारी भी मौजूद रहे। यहां से उनका काफिला सीधे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय पहुंचा। उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद छात्राओं ने कुलगीत गाया। इस समय दीक्षांत समारोह अपनी गति से आगे बढ़ रहा है। 65 मेधावियों को आज गोल्ड मेडल मिलना है जिसमें 14 छात्र और 51 छात्राएं हैं।

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